मास्टरशेफ फाइनलिस्ट हिरल अग्रवाल की ‘Mum-Preneur’ बनने की कहानी..

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मास्टरशेफ के बाद हिरल ने अपनी केक शॉप, केकोहॉलिक्स गोरखपुर में खोली और इसके बाद इसका चेन वो बाकी जगहों पर भी खोल रही हैं।

आज महिला दिवस है और एक से बढ़कर एक भारतीय महिलाओं जिनकी कहानियों से मेरी फेसबुक टाइमलाइन भरी हुई है। इनमें एक से बढ़कर अच्छी कहानी आपको भी प्रेरित करती है जिन्होंने देश के लिए काफी कुछ किया है।

हम अक्सर उन महिलाओं की बाते करते हैं। लेकिन आज हम  “mum-preneur” की बातें करेंगे जिन्होंने अपना सफर खुद ही तय किया है और सबको दिखाया कि वो क्या कर सकती हैं।

theindusparent ने मास्टरशेफ इंडिया सीजन 2 की फाइनलिस्ट हिरल सुथर अग्रावल से बातें की उनकी मास्टरशेफ के बाद उनकी यात्रा कैसी रही।

मास्टरशेफ के बाद हिरल ने अपनी केक शॉप, केकोहॉलिक्स गोरखपुर में खोली और इसके बाद इसका चेन वो बाकी जगहों पर भी खोल रही हैं।वो दो बेटियों की मां हैं। उनका कहना है कि  “मेरे अंदर की मां मुझे और भी क्रिएटिव बनाती है। बच्चे केक पर अपने फेवरिट कार्टून की को देख काफी खुश होते हैं और इससे मुझे काफी खुशी मिलती है।”
पढ़िए उनकी अभी तक की बेहतरीन यात्रा

1. मास्टरशेफ इंडिया के फिनाले तक पहुंचना कैसा लग? इससे आपकी जिंदगी कैसे बदल गई?

ऑडिशन से लेकर मास्टर शेफ के फिनाले तक की यात्रा बहुत ही अच्छी रही। मुझे सिर्फ इतना पता था कि मुझे कुकिंग में दिलचस्पी है। मेरे पास कोई ग्रांड प्लान नहीं था। मैं बस इसमें चली गई थी। मुझे लगता है कि ये मेरा एट्टियूड था जो मुझे हर लेवल पर आगे ले गया। मैं मास्टरशेफ के अंत में क्या होगा इसपर ध्यान ही नहीं दे रही थी मैं बस मास्टशेफ की यात्रा को इंज्वॉय कर रही थी।


इसमें कोई शक नहीं है कि मास्टरशेफ में काफी कुछ सीखने मिला और खुद को डिस्कवर का भी बहुत मौका मिला। अपने पैशन, फूड इंडस्ट्री काफी कुछ के बारे में विस्तार से समझ आया। ये सामने वाले पर निर्भर करता है कि वो एक्सपोजर को कैसे इस्तेमाल करता है। इसकी वजह से बेशक नॉर्मल लाइफ और फैमिली का समय हमें इसे इस्तेमाल करने में देना पड़ता है।
लेकिन मैं बोलना चाहुंगी कि ये काफी आसान भी है। भले मुझे अचानक सफलता मिली लेकिन मेरे परिवार ने मुझे हमेशा जमीन से जो़ड़े रखा। पहचान मिलने के बाद सेलिब्रिटी जैसा एहसास होता है लेकिन आखिरकार खाना बोलता है कि हम कितने बड़े सेलिब्रिटी हैं। इन सबके साथ ही मेरे पति और बेटियां मुझे उत्साहित करती हैं।

2. आपने केकोहॉलिक्स की शुरूआत कैसे की
सबसे आश्चर्यचकित करने वाली बात ये है कि जब आप कुकरी शो पर आते हैं तो सबको लगता है कि आपको खाने से जुड़ी सारी जानकारी है। मैं जानती भी हूं लेकिन मास्टरशेफ के बाद लोगों में धारणा बन गई थी कि मैं शहर में सबसे अच्छा केक बनाती हूं। मुझे नहीं पता कि ऐसा सच में था या नहीं  लेकिन लोगों के विश्वास की वजह से मैं इसे मुकाम तक पहुंचा पाई ।कुछ इस तरह केकोहॉलिक्स बना था।

ये मेरे तीसरे बच्चे की तरह है और मुझे इसपर गर्व है। एक ऐसा इंसान जिसके पास बेकिंग की कोई ट्रेनिंग तक नहीं थी बस मेरे फ्लेवर इंस्टिंक्ट मुझे गाइड करने के लिए थे। हमने 3 साल में 2 आउटलेट खोले हैं और इस साल के अंत तक दो और खोलना चाहते हैं। मेरे पति अमित केकोहॉलिक्स के कर्ता धर्ता में से एक हैं।

मुझे खुद में हालांकि ज्यादा कॉन्फिडेंस नहीं था लेकिन अमित को था कि मैं डिमांड के साथ सबकुछ कर पाउंगी। मैं खुद को हमेशा से नमकीन और चटपटे व्यंजन बनाने वाली इंसान मानती थी ना कि स्वीट्स और डिर्जट। लेकिन अब हम क्रेजी तरीके से काम करते हैं। फ्लेवर का कॉम्बिनेशन हमेशा काम कर जाता है और यही इस काम की सबसे अच्छी चीज है। इससे एक्साइटमेंट भी बनी रहती है।

3. दो बेटियों की मां होने के नाते आप कैसे समय और लाइफ को बैलेंस करती हैं?
हमारे देश में मां होना काफी ओवररेटेड है जबकि ये खूबसूरत एहसास है। अगर आप कामकाजी हैं तो लोग अक्सर पूछते हैं कि बच्चों को कौन देखता है ? जब आप घर में नहीं होती तो कौन देख रेख करता है ? खाना कौन बनाता है? और एक क्लासिक लाइन अच्छा आप कामवाली रखती हैं।  लेकिन मैं बच्चे को कभी कामवाली पर नहीं छोड़ती। मैं किसी पर भरोसा नहीं करती हूं लेकिन क्या इससे मैं बुरी मां बन गई?

क्या ये अच्छा नहीं है कि मेरी बेटियां अपनी मां को खुद की पहचान बनाते देख रही हैं जो उनके लिए भी रास्ता तैयार कर रहा है। हो सकता है वो इसे फॉलो ना करें या करें ये उनकी मर्जी है और उनकी मर्जी का पूरा सम्मान होगा लेकिन क्या ये उनके लिए एक विक्लप नहीं है। घर और काम दोनों संभालना आसान बस हमें प्राथमिकताएं पता होनी चाहिए।

इसके लिए हमेशा अपने पैरों पर खड़ा रहना पड़ता है। कभी कभी काम को प्राथमिकता देनी पड़ती है। बच्चो को गुड मॉर्निंग या गुड नाइट नहीं विश कर पाती लेकिन फिर दूसरे दिन काम से ज्यादा प्राथमिकता परिवार को देती हूं।

आपको बस ये निर्णय लेना होता है कि क्या पहले आता है और उसके हिसाब से हमें काम करना चाहिए। सबसे बड़ी बात इसके लिए शर्माने जैसी कोई बात नहीं होती और अगर ऐसा हुई तो आप नां तो मां और ना ही अपने काम के साथ न्याय कर पाएंगी। सभी दिन एक जैसे नहीं होते लेकिन मदद करने वाले पति हो तो सब आसान हो जाता है और मैं इस मामले में लकी हूं।

4. Motherhood के कारण कैसे आपके बिजनस को सफलतापूर्वक चलाने में मदद मिली?

आप विश्वास नहीं करेंगे कि मुझे अपनी बड़ी बेटी से कैसे कैसे फीडबैक मिलते हैं। वो सही मायनों में मेरी क्रिटिक है। छोटी बेटी अभी काफी छोटी है लेकिन उसका अपना तरीका है मेरे काम में हिस्सेदारी दिखाने का। एक बेकर और बिजनस वुमन के तौर पर मुझे समय पर काम खत्म कर और क्लाइंट के चेहरे पर खुशी देखकर खुशी मिलती है। मेरे अंदर की मां चाहती है कि केक में सबकुछ बिल्कुल परफेक्ट हो क्योंकि मुझे पता है कि एक परफेक्ट खूबसूरत केक देखकर मेरे बच्चों की खुशी कैसी होती और बाकी बच्चों की कैसी होती है। मेरे अंदर की मां मुझे और भी ज्यादा क्रियेटिव बनाती है।

मैं उस स्माइल का हिस्सा बनना चाहती हूं जो बच्चे के चेहेर पर अपने फेवरिट कार्टून को देखकर आती है, एक पत्नी को उसके एनिवर्सरी केक पर देखकर आती है।ये प्रोफेशनली नहीं सिखाया जा सकता ये इमोशन है जो हम अपने काम में डालते हैं।

5. तीन परवरिश के नियम जिसे आप मानती हैं..

परवरिश के कोई नियम नहीं होते।हर बच्चा अलग होता है और हर पैरेंट अलग तरीके से सोचते हैं। लेकिन मैं मानती हूं कि बच्चों पर हर तरह से विशिष्ट होने का दवाब डालना गलत है। आजकल  पैरेंट्स काफी डिमांडिंग हैं जो गलत है हर बच्चा अपनी किस्मस से आता है। हां मैं मानती हूं कि पैरेंट्स को गाइड करने की जरुरत होती है और इतना ही करना भी चाहिए। वो गलती करेंगे, सीखेंगे, समझेंगे और आगे बढ़ेंगे।

उन्हें जिंदगी जीने की कला सिखानी चाहिए कि जिंदगी में कोई भी समय हमेशा विजेता बनकर उभरना चाहिए। क्या आज ये मायने रखता है कि मेरे 8वीं में क्या ग्रेड थे या ग्रेजुएशन में कैसे नंबर थे।सच्चाई यही है कि सबसे ज्यादा मायने रखता है कि क्या कौशल हमारे अंदर है और हम उसका इस्तेमाल कैसे करते हैं। और ये सब शिक्षा मुझे किसी क्लास में नहीं मिले थे।

आजकल बच्चों को उनका बचपन इंज्वॉय करने देना चाहिए क्योंकि हमें जैसी आजादी मिली थी उसमें हम इंज्वॉय नहीं कर पाए थे।

6. आप उन माओं को क्या संदेश देना चाहेंगी जो कुछ करना चाहती हैं लेकिन अभी तक ब्रेक नहीं मिला है?

जैसा मैंने पहले बोला कि सभी समस्याएं आपके सर में होती है अगर आप उन्हें सुलझा पाती हैं तो जिंदगी और भी आसान हो जाती है। मैं ये नहीं कहती कि इससे समस्याएं खत्म हो जाएंगी लेकिन आपको समझ आ जाएगा कि किसे पहले सुलझाना है।

मेरा मानना है कि अगर समस्या है तो उसका समाधान भी होगा और अगर समाधान नहीं है तो आपको उसपर तुंरत काम करना शुरू करना चाहिए” सफलता, कठिनाई, पैसा, कम पैसा, बच्चे, मदद करने वाले या मदद नहीं करने वाले परिवार के सदस्य, टैलेंट, स्किल मायने यही रखता है कि आप क्या सोचते हैं क्योंकि वही आप में दिखता है।

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Source: theindusparent

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