नारायण मूर्ति का अपनी बेटी के नाम लिखी ये चिट्ठी सभी पिता के लिए बहुमूल्य है ।

Share this article with other mums

आईटी की दुनिया के जाने माने इंसान नारायण मूर्ति ने अपनी बेटी को एक खत लिखा है । हम हमेशा माँ के बलिदान और योगदान की बात करते हैं । कभी पिता की बात होती ही नहीं है, किसी को नहीं पता की एक पिता कैसे अपनी ज़िन्दगी को बच्चों के लिए बदलता रहता है

आईटी की दुनिया के जाने माने इंसान नारायण मूर्ति ने अपनी बेटी को एक खत लिखा है । हम हमेशा माँ के बलिदान और योगदान की बात करते हैं । कभी पिता की बात होती ही नहीं है, किसी को नहीं पता की एक पिता कैसे अपनी ज़िन्दगी को बच्चों के लिए बदलता रहता है वो भी बिना किसी की को बताये। इस एहसास को नारायण मूर्ति से बेहतर और कौन बता सकता है । अपनी बेटी अक्षता को लिखी एक चिट्ठी में से पेरेंटिंग के 6 बहुमूल्य बातें आपके लिए ।
#1 पिता बनने के बाद पुरुष और भी ज्यादा संवेदनशील हो जाता है
मिस्टर मूर्ति अपनी चिट्ठी की शुरुवात में बताते हैं की कैसे पिता बनने के बाद पुरुष और भी ज्यादा संवेदनशील हो जाता है, इसके अलावा वो ज़िन्दगी के हर पहलु को एक अलग अंदाज़ से देखना शुरू करता है ।
“पिता बनने के बाद मुझमे जो बदलाव आएं हैं मैं खुद अचंभित था की ये हो क्या रहा है । मैं अब सिर्फ एक पति, एक बेटा या बहुत तेजी से बढ़ती कंपनी में नौकरी करने वाला नहीं रह गया था । तुम्हारे  जन्म के साथ मेरे जीवन के भी बेंचमार्क बढ़ते चले गए । कार्यालय में मेरी बातचीत, मेरे बुने का हाव भाव और गम्भीर हो गया। अब मैं ज्यादा सोच समझ कर बोलने लगा था । मेरी बातचीत, मेरे हाव भाव पहले से ज्यादा सम्मानजनक और उदार हो गए थे । मुझे हर इंसान के साथ संवेदनशीलता से पेश आने की जरूरत महसूस होने लगी।”
#2 पिता के लिए भी पेरेंटिंग आसान नहीं होती है । 
माँ के बारे में तो बहुत कुछ कहा जाता है । मूर्ति बताते हैं की बेटी के जन्म के बाद उन्हें बच्चे का पालन पोषण और कैरियर को साथ में लेकर चल पाना बहुत मुश्किल लगता था । “मेरा दिमाग कभी कभी तुम्हारे जन्म के तुरन्त बाद के कुछ दिनों में चला जाता है । तुम्हारी माँ और मैं, तब जवान थे और ओन कैरियर बनाने के लिए जद्दोजहत में लगे थे । हुबली में तुम्हारे जन्म के 2 महीने बाद हम तुम्हे मुम्बई ले आये। लेकिन जल्दी ही लगा की तुम्हे शुरू शुरू में हुबली में अपने दादा दादी के साथ रहना चाहिए । ये फैसला करना मेरे लिए आसान नहीं था इसीलिए इस फैसले में कई दिन लगे मुझे । हर वीकेंड पर मैं बेलगौम तक जहाज से जाता और फिर कार से हुबली। ये सब भुत खर्चीला था लेकिन तुम्हे देखे बिना कुछ अच्छा नहीं लगता था।
murthy-with-kids
#3 पिता को माँ को लीड लेने देना चाहिए 
 जब भी उनसे पूछा जता है की उन्होंने अपने बच्चों में किस तरह के गुण भरे हैं, वो हमेशा अपनी पत्नी को अपने जवाब में साथ रखते हैं ।
“उन्होंने रोहन और तुम्हे सादगी की कीमत समझाई . एक बार बंगलौर में तुम स्कूल ड्रामा के लिए चुनी गयी थी जिसमे तुम्हे एक ख़ास कपडे पहन कर जाना था. ये 80 के दशक के बीच की बात है जब इनफ़ोसिस ने अपना काम शुरू ही किया था और हमारे पास पैसे नहीं थे . तुम्हारी माँ ने तुम्हे समझाया की हम तुम्हारे लियेब कपडे नहीं खरीद सकते इसीलिए तुम उस ड्रामा से अपना नाम वापस ले लो . बहुत दिन बाद तुमने मुझे बताया की तुम्हे वो बात अच्छी नहीं लगी थी .
#4 ज़िन्दगी में सबसे ज्यादा ख़ुशी देने वाली चीज़ बड़ी साधारण सी होती है और बिलकुल मुफ्त होती है .
“तब से लेकर आजतक ज़िन्दगी बहुत बदल गयी हिया और आज हमारे पास पैसा है . मुझे याद है जब मै तुम्हारी माँ के साथ ये बात कर रहा था की तुम्हे कार से स्कूल भेजे जब हमारे पास पैसे हो जाएँ, लेकिन तुम्हारी माँ ने हमेशा कहा की तुम्हे अपने दोस्तों के साथ ऑटोरिक्शा में ही जाना चाहिए . तुमने रिक्शा वाले अंकल को भी अच्छा दोस्त बना लिया था. कई बार साधारण सी दिखने वाली चीजें ही आपको खुशियाँ दे जाती हैं “
narayan-sudha-murthy-cropped
#5 परिवार के साथ अच्छा समय बिताना बहुत जरुरी है 
एक और बात जिसपर नारायण मूर्ति जोर देते हैं वो है परिवार के साथ वक़्त बिताना . आजकल हम देखते हैं की ज्यादातर परिवारों में लोग टीवी देखने में गेम खेलने में या अपने अपने काम में मशगुल रहते हैं. लेकिन समय निकाल कर एक दुसरे से बात करना भी बहुत ज्यादा जरुरी है . इससे ना सिर्फ रिश्ते अच्छे होते हैं बल्कि आप एक दुसरे को अच्छे से जान भी पाते हैं .
“तुम सोचती होगी की जब तुम्हारे दोस्त टीवी पर आने वाले चीजों की बाते करते होंगे तब तुम्हारे घर पर टीवी क्यों नहीं थी . तुम्हारी माँ ने बहुत पहले तय कर लिया था की घर में कोई टीवी नहीं होगी ताकि पढने के लिए, बात करने के लिए या दोस्तों से मिलने के लिए समय बचा रहे .इसीलिए रोज शाम को 8 से 10 बजे तक हम वो काम करते थे जिससे परिवार का बंधन मजबूत हो और सभी एक दुसरे के और करीब आ जायें . इन समयों पर तुम और रोहन होम वर्क कर लिया करते थे , मै और तुम्हारी माँ इतिहास, गणित, भौतिक विज्ञानं, इंजीनियरिंग आदि की कुछ किताबें पढ़ लिया करते थे .
#6 एक जिम्मेदार पैरेंट होना बहुत जरुरी है 
मूर्ति छिट्ठी के अंत में एक बहुत ही जरूरी सन्देश देते हैं जिसे हम सभी को अपने जीवन में उतार लेना चाहिए ताकि हम धरती को बचाने में अपना योगदान दे सकें .”चाहे ज़िन्दगी में तुम कितना भी आगे चले जाओ हमेशा ध्यान रखना की हमारा एक ही ग्रह है, एक ही घर है, वो है पृथ्वी जो अब खतरे में है . याद रखना की ये तुम्हारी जिम्मेदारी है की इस ग्रह को एक हमारी दी गयी स्थिति से बेहतर अवस्था में कृष्णा को तुम सौंप सको “

इस आर्टिकल के बारे में अपने सुझाव और विचार कॉमेंट बॉक्स में ज़रूर शेयर करें  

Hindi.indusparent.com द्वारा ऐसी ही और जानकारी और अपडेट्स के लिए  हमें  Facebook पर  Like करें 

परिवार व छुट्टियां