“मैं अपनी बच्ची को रोज डेकेयर में भेजकर क्यों खुश हूँ”

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मुझसे कई लोग पूछते हैं की मुझे अपनी बच्ची को पूरा दिन डेकेयर में भेजकर कोई ग्लानि नहीं होती क्या?

मैं एक कामकाजी माँ हूँ इसीलिए सभी आंटीयाँ, घर पर रहने वाली आंटी जो मेरी बिल्डिंग में रहती हैं उनके लिए मैं एक अटेंशन का विषय हूँ । माँ बनने के बाद भी मैंने काम करना जारी रखा और बच्चे को डेकेयर में भेजना शुरू कर दिया ।मुझसे कई लोग पूछते हैं की मुझे अपनी बच्ची को पूरा दिन डेकेयर में भेजकर कोई ग्लानि नहीं होती क्या? इसके अलावा कई ऐसे भी होते हैं जो मुझसे तो कुछ नहीं कहते पर मेरी बेटी को सहानुभूति की नज़र से देखते हैं, मानो वो कह रहे हों, “बेचारी, दिनभर डेकेयर में रहती है ।”
सबसे पहले तो मैं अपने बच्चे को कोसे पालना या बड़ा करना चाहती हूँ इससे उन्हें कोई मतलब होना नहीं चाहिए । दूसरी बात मैं सबको एक ही बार जवाब देना चाहूंगी । हाँ मैं अपनी बेटी को डेकेयर में भेजती हूँ और मैं इससे खुश हूँ । मुझे इस बात की कोई ग्लानि नहीं है । कारण जानना चाहते हैं तो सुनिए :
#1 मैं महत्वाकांक्षी हूं
हाँ मैं महत्त्वाकांक्षी हूँ और अपने जीवन में सफल होना चाहती हूँ । इसमें कुछ गलत है? क्या मेरा माँ होना मेरे कैरियर में रोड़े की तरह आना चाहिए ? नहीं ।
मैं माँ बनने के बाद और मजबूत हुई हूँ, और ज्यादा अपने काम पर ध्यान केंद्रित करने लगी हूँ । मेरी बेटी ने मुझे धैर्य रखना सिखाया, उसने मुझे और ज्यादा समझदार बनाया और जिम्मेदार भी ।
मैं उसे अपनी निराशा की शिकार नहीं बनाना चाहती, मैं उससे बहुत आयर करती हूँ और उसे एक बोझ की तरह नहीं समझती ।
#2 ये नियम पिता पर क्यों लागु नहीं होते?
जब मैं नौकरी ढूंढ़ रही थी तब सभी मुझसे पूछते थे की बच्चे का ध्यान कैसे रखोगे? क्या कभी यही सवाल किस पोत से पूछा गया है ? क्या बच्चे को सँभालने की जिम्मेदारी सिर्फ माँ की होती है ? मुझे ख़ुशी है की मेरे पति मुझे समझते हैं और इसीलिए जब भी मेरी बेटी बीमार होती है या उसकी छुटियाँ होती है तो हम दोनों बारी बारी से छुटियाँ लेकर उसके साथ समय बिताते हैं।
#3 मैं एक आत्म-विश्वास से भरी बेटी चाहती हूँ
वो दिन अब चले गए जब आप बच्चे से कहते थे की पाप नौकरी पर जाते हैं, मम्मी घर पर रहती है । आज वक़्त बदल गया है और ज्यादा से ज्यादा महिलाएं घर से निकल रही हैं और पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही हैं और कमा भी रही हैं ।
मैं चाहती हूँ की मेरी बेटी इस बात को समझे की उसकी माँ और भी बहुत से कम कर सकती है । मैं एक उदाहरण पेश करना चाहती हूँ ताकि वो भी कल को सपने देखे और उसे साकार करने के लिए आगे बढ़े। मैं उसे सजा नहीं दे रही बल्कि बाहर की कठोर दुनिया के लिए तैयार कर रही हूँ।
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#4 मैं अपने सास ससुर को बेबी सिटर की तरह नहीं देखना चाहती
मुझे भी लगा था की बच्चे की देखभाल के लिए मैं अपने सास ससुर को बुला लूँ लेकिन मैंने ऐसा नहीं किया, क्यों ?
क्योंकि मैं नहीं चाहती की इस उम्र में जब उन दोनों को साथ में वक़्त बिताना चाहिए, घूमना चाहिए, परिवारजनों से मिकना चाहिए, वो घर पर बैठकर सिर्फ बच्ची की देखभाल करें ।
हम बहुत छोटे शहर से आते हैं, जहाँ उनकी पूरी उम्र बच्चों के देखभाल में और उनके सपने पुरे करने में निकल गयी । उन्होंने अपनी जरूरतों, अपनी ख्वाहिशों को हमेशा दबाये रखा । और अब मैं उनसे कहूँ की अब आप मेरी बेटी का भी ध्यान रखो ? ये ठीक नहीं है । आपको ऐसा नहीं लगता ?
#5 मैं आर्थिक रूप से आत्म-निर्भर होना चाहती हूँ 
 मै आर्थिक रूप से स्वतंत्र रहना चाहती हूँ , ये भी एक सच है . हम एक मनी माइंडेड समाज में रहते हैं जहाँ खुद को बचाए रखने के लिए पैसे कमाना जरूरी है .पुरुष के तरह महिलाओं को भी अब कमाना चाहिए और अपनी आर्थिक स्वतंत्रता हासिल करनी चाहिए .भगवान् न करे की आपका तलाक हो जाए फिर आप क्या करेंगे ? भारत में तलक लेने का ट्रेंड तेजी से नहीं बढ़ रहा है ? बेहतर है की तैयारी हर चीज़ की कर के रखें .

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